बुढ़ार रोड बैंक के सामने रफ्तार का कहर, कार की टक्कर से महिला की मौत स्कूटी से रेलवे स्टेशन जा रही थी 45 वर्षीय सरोज, चचेरा भाई गंभीर घायल
रोड के दोनों तरफ फैला अतिक्रमण भी कई बार एक्सीडेंट का कारण बनता है
शेखर खान संपादक
शहडोल। कोतवाली थाना क्षेत्र के बुढार रोड पर सेंट्रल बैंक के पास तेज रफ्तार कार ने स्कूटी सवार दो लोगों को पीछे से जोरदार टक्कर मार दी। हादसे में स्कूटी सवार 45 वर्षीय महिला की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि उसका चचेरा भाई गंभीर रूप से घायल हो गया। दुर्घटना के बाद घटनास्थल पर अफरा-तफरी मच गई। सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और शव को कब्जे में लेकर मामले की जांच शुरू की। मृतका की पहचान सरोज पत्नी राजेंद्र जायसवाल, निवासी धोबिया टंकी, जिला रीवा के रूप में हुई है। पुलिस के मुताबिक सरोज अपने चचेरे भाई सौरभ के साथ स्कूटी से रीवा जाने के लिए रेलवे स्टेशन जा रही थीं। दोनों बुढार रोड पर सेंट्रल बैंक के समीप पहुंचे ही थे कि पीछे से तेज गति में आ रही कार ने स्कूटी को अपनी चपेट में ले लिया। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि स्कूटी सवार दोनों लोग उछलकर सड़क पर जा गिरे और महिला के सिर के ऊपर से वाहन चढ़ाते हुए वाहन चालक फरार हो गए। गंभीर चोट लगने से सरोज ने मौके पर ही दम तोड़ दिया, जबकि सौरभ गंभीर रूप से घायल हो गया। हादसे के बाद कार चालक मौके से फरार हुआ या नहीं, इसे लेकर पुलिस जांच कर रही है। दुर्घटना के बाद सड़क पर लोगों की भीड़ जमा हो गई। स्थानीय लोगों ने घायल की मदद करते हुए पुलिस को सूचना दी। पुलिस ने मौके पर पहुंचकर घायल को उपचार के लिए भेजने की कार्रवाई की और शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। पुलिस दुर्घटना के कारणों और कार चालक की पहचान की जांच में जुटी है।
सवाल सिर्फ हादसे का नहीं, सड़क सुरक्षा का भी
जुलाई में शहर की यातायात व्यवस्था सुधारने के लिए पुलिस अधीक्षक डॉ. संजय कुमार अग्रवाल ने यातायात थाने का औचक निरीक्षण कर अधिकारियों-कर्मचारियों को अनुशासन, सीसीटीवी, बॉडी कैमरा और सड़क पर प्रभावी यातायात प्रबंधन के निर्देश दिए थे। यह हादसा ऐसे समय हुआ है, जब शहर में यातायात व्यवस्था को लेकर लगातार सवाल उठते रहे हैं। इसके बावजूद शहर की प्रमुख सड़कों पर तेज रफ्तार, गलत पार्किंग और यातायात नियमों की अनदेखी की शिकायतें सामने आती रही हैं। सितंबर की शुरुआत में गांधी चैक से इंदिरा चैक के बीच सड़क किनारे अव्यवस्था और फुटपाथ की समस्या भी रिपोर्ट की गई थी। इससे पैदल चलने वालों और वाहन चालकों के लिए सड़क पर दबाव बढ़ने की बात सामने आई।
नशे में ड्राइविंग पर निगरानी कितनी
हर गंभीर सड़क हादसे के बाद तेज रफ्तार के साथ यह सवाल भी उठता है कि क्या वाहन चालकों की नियमित जांच हो रही है? खासकर शाम और रात के समय शराब या अन्य नशीले पदार्थों के प्रभाव में वाहन चलाने वालों की जांच, स्पीड मॉनिटरिंग और संदिग्ध वाहनों की चेकिंग को लेकर प्रभावी व्यवस्था कितनी है? इस हादसे में चालक नशे में था या नहीं, इसका निष्कर्ष जांच के बाद ही सामने आएगा। बिना जांच के चालक को नशे में होने का दोषी ठहराना उचित नहीं होगा, लेकिन शहर में नशे में वाहन चलाने वालों के खिलाफ नियमित और प्रभावी जांच की जरूरत का सवाल जरूर खड़ा होता है।
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