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मदद के लिए चीखती रही 25 वर्षीय कल्पना मैं नहीं बचूंगी, बचा लीजिए माँ… ये लोग मुझे मार डालेंगे।

 मदद के लिए चीखती रही 25 वर्षीय कल्पना

मैं नहीं बचूंगी, बचा लीजिए माँ… ये लोग मुझे मार डालेंगे।


शेखर खान "पत्रकार"

रीवा मध्य प्रदेश 

रीवा के गांधी मेमोरियल अस्पताल में मदद के लिए चीखती रही 25 साल की कल्पना मिश्रा… लेकिन उसकी पुकार व्यवस्था के कानों तक नहीं पहुँची। कुछ घंटे बाद जच्चा और बच्चा—दोनों की मौत हो गई।


यह कोई दूर-दराज़ का अस्पताल नहीं, बल्कि मध्य प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री एवं उपमुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल के गृह जिले रीवा का सबसे बड़ा सरकारी अस्पताल है। 


जब अस्पताल में एक गर्भवती महिला अपनी जान बचाने के लिए चीख रही थी, तब स्वास्थ्य व्यवस्था कहाँ थी?


जब वह कह रही थी माँ मुझे बचा लो, तब जिम्मेदार अधिकारी क्या कर रहे थे?


निलंबन से एक परिवार की बेटी और उसके बच्चे की जान वापस नहीं आएगी।

जिम्मेदारी सिर्फ नर्स या डॉक्टर की नहीं, उस पूरी व्यवस्था की है जिसकी निगरानी स्वास्थ्य मंत्री करते हैं।


अगर अपने ही गृह जिले के सबसे बड़े अस्पताल में एक महिला मदद की गुहार लगाते-लगाते दम तोड़ दे, तो फिर स्वास्थ्य मंत्री जवाबदेही किसकी तय करेंगे?


कल्पना की आखिरी चीख सिर्फ एक परिवार का दर्द नहीं, मध्य प्रदेश की बदहाल स्वास्थ्य व्यवस्था के मुंह पर तमाचा है।





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