"D" COMPANY के सट्टे के ‘काले धन’ का शहडोल कनेक्शन?
प्रॉपर्टी से मॉल तक निवेश का खेल, सनपाल के नाम पर उठे सवाल
जांच हुई तो खुल सकता है करोड़ों का मनी ट्रेल
क्रिकेट सट्टे की कथित कमाई रियल एस्टेट में लगाने के आरोप
शेखर खान "पत्रकार"
शहडोल। क्रिकेट सट्टेबाजी के कथित अवैध कारोबार से निकलने वाले पैसों का इस्तेमाल क्या शहडोल में जमीन, प्रॉपर्टी और बड़े व्यावसायिक प्रोजेक्ट्स खड़े करने में किया जा रहा है? शहर में तेजी से बढ़ती कुछ संपत्तियों और बड़े निर्माण कार्यों के बीच यह सवाल अब चर्चा के केंद्र में है। इन चर्चाओं में दाउद के सट्टेबाजी के कथित नेटवर्क से जुड़े सनपाल बंधु का नाम भी सामने आ रहा है।
आरोप लगाया जा रहा है कि सट्टेबाजी के कारोबार से आने वाले कथित पैसों को सीधे इस्तेमाल करने के बजाय प्रॉपर्टी और व्यावसायिक गतिविधियों के माध्यम से निवेश किया जा रहा है। हालांकि, इस दावे की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है। यही वजह है कि पूरे मामले में पैसे के स्रोत और उसके अंतिम ठिकाने की जांच सबसे अहम हो जाती है।
सवाल सिर्फ सट्टे का नहीं, ‘पैसा कहां जा रहा है’ का है
सट्टेबाजी के नेटवर्क पर कार्रवाई की खबरें समय-समय पर सामने आती रही हैं, लेकिन असली सवाल हमेशा यही रहता है कि इस अवैध कारोबार से पैदा होने वाला पैसा आखिर जाता कहां है? यदि करोड़ों रुपये की कथित सट्टा कमाई को जमीन, कॉमर्शियल प्रॉपर्टी, मॉल शू, मोबाइल स्टोर, होटल या अन्य कारोबार में लगाया जा रहा है, तो संपत्तियों की खरीद, निर्माण की लागत, निवेशकों और बैंकिंग लेन-देन की जांच से पूरे नेटवर्क की तस्वीर सामने आ सकती है।
पूर्व में जबलपुर में सनपाल से जुड़े बताए गए एक कथित कैश कलेक्शन सेंटर पर पुलिस और आयकर विभाग की कार्रवाई में नकदी तथा लेन-देन और प्रॉपर्टी से संबंधित दस्तावेज बरामद किए जाने की रिपोर्ट प्रकाशित हुई थी। ऐसे पुराने मामलों की पृष्ठभूमि में शहडोल में सामने आ रहे आरोपों की स्वतंत्र वित्तीय जांच की मांग को गंभीरता से देखा जा रहा है।
शहडोल में कौन है ‘फ्रंटमैन’?
अगर आरोपों में दम है तो सबसे बड़ा सवाल यह है कि शहडोल में कथित नेटवर्क को कौन संभाल रहा है? क्या संपत्तियां सीधे संबंधित लोगों के नाम पर खरीदी गईं या अलग-अलग व्यक्तियों, फर्मों और कंपनियों के नाम इस्तेमाल किए गए? क्या बड़े प्रोजेक्ट्स में वास्तविक निवेशक कोई और है? क्या जमीन खरीदने और निर्माण में इस्तेमाल धन का स्रोत घोषित आय से मेल खाता है? इन सवालों के जवाब रजिस्ट्री दस्तावेज, बैंक खातों, आयकर रिकॉर्ड, कंपनियों की हिस्सेदारी और निर्माण परियोजनाओं की फंडिंग की जांच से ही सामने आ सकते हैं।
‘काली कमाई’ को ‘सफेद निवेश’ बनाने का खेल?
रियल एस्टेट को लंबे समय से बड़े पैमाने पर धन निवेश करने
वाला क्षेत्र माना जाता रहा है। ऐसे में यदि किसी अवैध कारोबार से अर्जित धन को प्रॉपर्टी में लगाया गया हो तो यह केवल सट्टेबाजी का मामला नहीं रहेगा, बल्कि अवैध धन के निवेश और मनी ट्रेल की जांच का विषय बन सकता है। शहडोल में जिन संपत्तियों और बड़े प्रोजेक्ट्स को लेकर सवाल उठ रहे हैं, उनकी खरीद और निर्माण में लगी रकम का स्रोत यदि जांच एजेंसियां खंगालें तो यह पता लगाया जा सकता है कि पैसा किस खाते से आया, किसके माध्यम से पहुंचा और आखिर किस संपत्ति में लगाया गया।
शहडोल में बढ़ती करोड़ों की संपत्तियों के पीछे पैसा किसका है और उसका स्रोत क्या है? यदि सब कुछ वैध है तो दस्तावेज जांच में स्थिति स्पष्ट हो जाएगी। और यदि कहीं अवैध धन का रास्ता मिलता है, तो जमीन से लेकर सट्टे के नेटवर्क तक पूरा आर्थिक खेल सामने आ सकता है।

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