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शहडोल को मिली नई कलेक्टर: एलएलबी की पढ़ाई पूरी करने के बाद सिविल सेवा परीक्षा तैयारी शुरू की किसान की बेटी मिशा सिंह ने संभाला शहडोल जिले की कमान

शहडोल को मिली नई कलेक्टर: एलएलबी की पढ़ाई पूरी करने के बाद सिविल सेवा परीक्षा तैयारी शुरू की किसान की बेटी मिशा सिंह ने संभाला शहडोल जिले की कमान



शेखर खान "पत्रकार"

शहडोल। मध्य प्रदेश कैडर की वर्ष 2016 बैच की भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) अधिकारी मिशा सिंह ने शहडोल जिले के नए कलेक्टर के रूप में पदभार ग्रहण कर लिया है। उनके पदभार संभालने के साथ ही जिले में प्रशासनिक कार्यों को नई दिशा मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।

मिशा सिंह का जीवन संघर्ष, मेहनत और लगन का प्रेरणादायक उदाहरण माना जाता है। एक किसान परिवार से आने वाली मिशा सिंह ने सीमित संसाधनों के बावजूद अपनी पढ़ाई पूरी की और देश की सबसे कठिन प्रतियोगी परीक्षा संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) में सफलता हासिल की। उन्होंने एलएलबी की पढ़ाई पूरी करने के बाद सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी शुरू की और लगातार प्रयास करते हुए तीसरे प्रयास में सफलता प्राप्त कर भारतीय प्रशासनिक सेवा में चयनित हुईं।

मिशा सिंह का जन्म 8 मार्च 1988 को हुआ था। उन्होंने उत्तर प्रदेश के फैजाबाद स्थित डॉ. राम मनोहर लोहिया अवध विश्वविद्यालय से प्रशासनिक विधि (Administrative Law) में स्नातक एवं स्नातकोत्तर की उपाधि प्राप्त की। कानून की पढ़ाई के दौरान ही उन्होंने प्रशासनिक सेवा में जाने का लक्ष्य तय कर लिया था और उसी दिशा में निरंतर मेहनत करती रहीं।

प्रशासनिक अनुभव की बात करें तो मिशा सिंह इससे पहले रतलाम जिले में कलेक्टर के रूप में अपनी सेवाएं दे चुकी हैं। इसके अलावा वे जबलपुर में अपर कलेक्टर के पद पर भी कार्यरत रही हैं, जहां उन्होंने कई प्रशासनिक और जनकल्याणकारी कार्यों का प्रभावी संचालन किया। उनके कार्यकाल को बेहतर प्रशासन, पारदर्शिता और जनसुनवाई के लिए जाना जाता है।

अब शहडोल जिले की जिम्मेदारी संभालने के बाद लोगों को उनसे विकास कार्यों में तेजी, बेहतर कानून-व्यवस्था, जनसमस्याओं के त्वरित समाधान और सुशासन की उम्मीद है। जिले के विभिन्न सामाजिक संगठनों, जनप्रतिनिधियों और नागरिकों ने नई कलेक्टर मिशा सिंह का स्वागत करते हुए उनके सफल कार्यकाल की शुभकामनाएं दी हैं।

                             प्रेरणा की मिसाल


मिशा सिंह की सफलता इस बात का प्रमाण है कि यदि लक्ष्य स्पष्ट हो और मेहनत ईमानदारी से की जाए, तो किसान परिवार की बेटी भी देश की सर्वोच्च प्रशासनिक सेवा तक पहुंच सकती है। उनकी कहानी आज प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे हजारों युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत है।

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